संज्ञा किसे कहते है और इसके कितने भेद है | What is a noun and how many types are there?

संज्ञा किसे कहते है (What is a noun and how many types are there?) • किसी भी वस्तु, व्यक्ति, भाव,

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सर्वनाम किसे कहते है और इसके कितने भेद है | What is a pronoun and how many types are there?

सर्वनाम किसे कहते है (What is a pronoun and how many types are there?) • संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त

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मोचीराम कविता | लेखक-सुदामा पाण्डे धूमिल (Mochiram poem Author-Sudama Pandey Dhumil)

मोचीराम कविता | लेखक-सुदामा पाण्डे धूमिल (Mochiram poem Author-Sudama Pandey Dhumil) आदमी की कीमत हर दृष्टि से अलग-अलग होती है

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हिन्दी साहित्य में सन्त काव्य की प्रमुख विशेषताएं | Main features of saint poetry in Hindi literature

सन्त कवि निर्गुणोपासक थे। वे ईश्वर को निर्गुण, निराकार, एवं सर्वव्यापी मानते हैं वे ईश्वर निर्गुण को राम, हरि नामों

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भारतीय धर्म-साधना में सन्त कवियों का स्थान

यह कहा जा सकता है कि सन्तकाव्य अकृत्रिम, सहज एवं गौरव का भाव से भरा हुआ है। समाज के प्रति

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आंचलिक उपन्यास के मूल तत्त्व तथा हिन्दी के आंचलिक उपन्यासकार

आंचलिक उपन्यास में क्षेत्र विशेष को समग्रता से देखने का आग्रह तथा सास्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के प्रति आग्रह,लोक भाषा

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साहित्य में उत्तर-आधुनिकतावाद | Saahity mein Uttar-Aadhunikataavaad

उत्तर-आधुनिकतावाद  (POST-MODERNISM) सामान्यतः आधुनिकता का अगला चरण उत्तर आधुनिकता है, किन्तु उत्तर आधुनिकतावादी दृष्टि आधुनिकता के गर्भ से उत्पन्न होते

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साहित्य में आधुनिकतावाद | Saahity mein Aadhunikataavaad

आधुनिकतावाद (MODERNISM) आधुनिक शब्द समय सापेक्ष है किन्तु इसका अर्थ अत्यन्त लचीला है जिसे विभिन्न संदर्भों में प्रयुक्त किया जाता

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हिन्दी साहित्य में मनोविश्लेषणवाद | Hindi saahity mein manovishleshanavaad

साहित्य का सम्बन्ध मानव मन से प्रगाढ़ रूप में है , मनोविज्ञान मानव व्यवहार का अध्ययन करता है और साहित्यकार

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हिन्दी साहित्य में मार्क्सवाद | Hindi Saahity Mein Maarksavaad

हिन्दी साहित्य में मार्क्सवाद – हिन्दी साहित्य में ‘प्रगतिवादी’ कविता ‘मार्क्सवाद’ से प्रभावित है। सच पूछा जाय तो मार्क्सवाद का

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