स्वंय पर विचार करें | Self Analyzation
स्वंय पर विचार करें | Self Analyzation
![]() |
Self Analyzation |
हमें हमारे विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार हमार सविधान देता है। इसी प्रकार किसी के भी विचारों को अपनाने से पहले उसे अपने ज्ञान से तर्क की कसौटी पर प्रखने की बात गीता में कहा गया है। समय हमेशा बदलता है और समय की जरूरत के हिसाब से समाज को चलाने वाले नियमों में भी बदलाव आवश्यक है। यही समय की कसौटी कहती है। लोकसूक्तियां समाज के लिए सीख हो सकती है, रूढी नही। इस प्रकार भूत हमारा दर्पण होता है, बीते हुऐ समय में किया कार्य हमारी छवी, हम स्व्ंय नही।
हम वर्तमान में स्वंय क्या है ये हमारे विचारों के श्रृंगार पर निर्भर करता है ।
Janshruti & Team